!! पहली बार होस्टल से पिक्चर देखने जाना !!
भगदड़-सी मची थी जैसे हमारे पूरे होस्टल में आज क्या सीनियर क्या जूनियर सबका एक-सा था अंदाज़। हर तरफ़ हो रही थी तैयारी व्यस्त थी आज लड़कियाँ सारी किसी के नहाने बारी,कोई पूछे नेलपोलिश सूखी क्या तुम्हारी। कोई कहे कि बाल बना दो कोई कहे खुले बाल है जाना कोई समझाए पागल मत बन खुले बाल का मतलब डाँट खाना। मेंहदी लगायी थी बालों में कल तो तेल लगा नहीं सकती थी सिरदर्द हो भी रहा है तो क्या कुछ घंटे तो सह ही सकती थी। मेंहदी, शैम्पू,नेल पोलिश सबसे निपट चुके थे अब भागमभाग शांत हो चुकी बाहर प्रतीक्षा कर रहे थे सब। नया सूट, नयी सैंडल और सबकी आँखें चहक रही थी कहीं खुले बाल,कहीं चोटी तरह-तरह की इत्र महक रही थी। कोई पहली बार नही था ये होस्टल से पिक्चर दिखलाना पर हम नयी लड़कियों को आज पहली बार था जाना। बड़े परदे पे बड़ा सिनेमा और संग बैठी होंगी पक्की सहेलियाँ सोच सोच मन फुदक रहा था भावनाएँ कर रही थी अठखेलियाँ। किसी ने तो छुपाकर पेन का ढक्कन साथ में रख लिया था सीटी बजाने तो आती नहीं...